नामवर जैसा कम्यूनिकेटर दूसरा नहीं

नामवर जैसा कम्यूनिकेटर दूसरा नहीं
डॉ. नामवर सिंह पर अक्सर ये आरोप लगाया जाता है कि वे लिखते तो हैं नहीं, केवल बोलते हैं। ये काफ़ी हद तक सही भी है और खुद नामवर जी इसे स्वीकार कर चुके हैं, बल्कि अपने पचहत्तरवें जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने सार्वजनिक रूप से ये भी कह दिया था कि उनके बोले को ही उनका रचनात्मक योगदान समझ लिया जाए। उसके बाद से टीका-टिप्पणियाँ थोड़ा कम तो हुईं मगर बंद नहीं हुईँ। दरअसल, नामवर जी के प्रशंसकों की तो बहुत बड़ी संख्या है ही मगर उनसे असहमत और अंसतुष्ट लोगों की भी एक बड़ी जमात है। उनकी नाराज़गी की कई वाज़िब वजहें भी हो सकती हैं, बल्कि होंगी ही, लेकिन ये भी एक सचाई है कि नामवर जी के योगदान को नकारने या उसे छोटा करने का एक अभियान भी चलता रहा है। Read More at Deshkaal.com
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